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मक्का अनुसंधान केन्द्र स्थानांतरण का मामला कांग्रेस सांसद उठाएंगे लोकसभा व राज्यसभा में
BINOD KARN
BEGUSARAI : मक्का अनुसंधान केंद्र बेगूसराय के स्थानांतरण का मामला राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। Ex. MLA विधायक श्रीमती अमिता भूषण ने बिहार कांग्रेस के सांसदों को पत्र लिखकर इस मामले को सदन में जोरदार तरीके से उठाने का आग्रह की है। उन्होंने सांसद राज्यसभा सह अध्यक्ष बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, लोकसभा सांसदों में तारिक अनवर, मो. जावेद, मनोज राम व राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को इस सिलसिले में पत्र लिखा है।
कांग्रेस सांसदों को लिखे पत्र में श्रीमती भूषण ने कहा है कि प्रदेश और बेगूसराय जिले के सन्दर्भ में वर्तमान केंद्र सरकार के एक दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय की सूचना से आप सभी अवगत होंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा सदन में एक प्रश्न के जवाब में यह सूचित किया गया है कि 15वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान बिहार के बेगूसराय जिले में 4 मई 1997 को 97.3 एकड़़ भूमि में स्थापित क्षेत्रीय मक्का अनुसन्धान एवं बीज उत्पादन केंद्र कुसमहौत को कर्नाटक के शिवमोगा जिले में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस संबंध में क़ृषि मंत्री का आदेश पत्र भी सार्वजनिक हो चुका है। मंत्री यह फैसला बिहार और बिहारवासियों के प्रति केंद्र सरकार के उपेक्षात्मक रवैये का परिचायक है। ज्ञातव्य हो कि यह केंद्र वर्तमान में सभी आवश्यक सुविधाओं से लैस है। केंद्र के पास बीज उत्पादन एवं अनुसन्धान के लिए पर्याप्त भूमि, बेहतरीन कार्यालय परिसर, कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर, सिंचाई और परिवहन की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में यहाँ देश के पूर्वी हिस्सों के लिए उपयुक्त मक्का संकर और सार्वजनिक संकर के पैतृक बीज का उत्पादन किया जा रहा है।
इतना ही नहीं इस केंद्र के माध्यम से जलवायु अनुकूलित मक्का संकर बीज, मक्का प्रजनन अनुसंधान के साथ-साथ खरीफ फसलों के लिए सोयाबीन बीज उत्पादन पर भी काम चल रहा है। इस केंद्र का लाभ न सिर्फ बेगूसराय जिला को बल्कि पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, समस्तीपुर सहित अन्य मक्का उत्पादक जिले के किसानों सहित पूरे प्रदेश को मिल रहा है। एक कृषि प्रधान राज्य और उसपर आश्रित अनेकानेक जिले के साथ किए जा रहे इस सौतेले व्यवहार पर एक जनप्रतिनिधि के तौर पर मुकदर्शक होकर नहीं रहा जा सकता है। इस केंद्र के बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्थापित होने के कारण मेरा इससे भावनात्मक लगाव भी जुड़ा है। आप सभी सम्मानित सदस्य संसद की मजबूत आवाज हैँ। इस केंद्र के स्थानांतरण को रोकने के लिये आप सभी के सामूहिक प्रयास की प्रतिबद्धता जरूरी है ताकि बिहार के साथ हो रहे इस अन्याय को रोका जा सके।
उन्होंने जिला पदाधिकारी को भी पत्र लिखकर इस मामले में यथोचित प्रशासनिक कार्रवाई का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि स्थानांतरण का आदेश दिसंबर में ही आ गया और आज जब मामले को लेकर आक्रोश बढ़़ रहा है तो स्थानीय सांसद आज पत्र लिखकर इसके स्थगन का आग्रह कर रहे हैं।