आस्था नाट्य रंग के तीसरे दिन दिखे तीन रंग
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आस्था नाट्य रंग के तीसरे दिन दिखे तीन रंग

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BINOD KARN

BEGUSARAI : दिनकर कला भवन बेगूसराय में विगत तीन दिनों से चली आ रही आस्था नाट्य रंग उत्सव का आज समापन किया गया। आज के मुख्य अतिथि के रूप में आशीर्वाद रंगमंडल के सचिव व प्रख्यात रंग निर्देशक अमित रौशन, बेगूसराय जिले से प्रथम एनएसडी उत्तीर्ण छात्र हरीश हरिऔध और वरिष्ठ रंगकर्मी दीपक सिन्हा ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन सत्र की शुरुआत की। संस्था परिवार के द्वारा आगंतुक अतिथि को पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्र व असम ट्रेडीशन का बनाया गया कलश भेंट स्वरूप दिया गया।








 आज पांचवें और छठे नाटक की प्रस्तुति की गई, पांचवें नाटक में था द प्लेयर्स एक्ट रंगमंडल की प्रस्तुति 'चेखव के दो रंग' जिसके लेखक अनतोन चेखव और परिकल्पना व निर्देशन गुंजन सिन्हा का था। इस नाटक में चेखव की दो कहानियाँ 'बदनाम कुँवारा' औत 'तूतू मैंमैं' की प्रस्तुति की गई जिसमें सत्यकेति (आईरिना), पायल जैसवाल (नतालिया), कुंदन सिन्हा (पीटर,चुबुकोव), गुंजन सिन्हा (निक्की,ईवान लोमोव) ने शानदार अभिनय कर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इसका प्रकाश संचालन हरीश हरिऔध और संगीत संचालन अंकित राज का था।



 बदनाम कुँवारा में एक कुँवारा युवक पीटर दूसरों की पत्नियों को अपने मोहपाश में बांधने में महारत हासिल होने का ढिंढोरा पीटता है, और ऐसा षड्यंत्र रचता है, जिससे एक विवाहिता आईरीना उसके जाल में फंसने के लिए विवश हो जाती हैं, लेकिन अंत में उसे एक पतिव्रता पत्नी आईरीना के हाथों मात खानी पड़ती है। इसके बाद उसका भ्रम दूर हो जाता है। और वो आगे से किसी भी विवाहिता को अपने मोहपाश में बांधने का इरादा त्याग देता है..! और 'तू तू मैं मैं' में दो पड़ोसियों की नोकझोंक पर आधारित है जिसमें एक पड़ोसी ईवान लोमोव दूसरे पड़ोसी चुबुकोव के यहां उसकी बेटी नतालिया के लिए प्रस्ताव लेकर जाता है पर बातों बातों में और अपने झूठे आडंबर को दिखाने में मुख्य मुद्दे से भटक जाता है पर आखिर में विपरीत परिस्थिति में भी लोमोव के प्रस्ताव को स्वीकार कर नतालिया और लोमोव एक हो जाते हैं...!



दूसरे नाट्य प्रस्तुति रंग रूप वैशाली की नाटक 15 फीट लंबी दुनिया डिज़ाइनर डायरेक्टर थे अंजारूल हक। यह गरीब और जो झोपड़पट्टी में रहने वाले कूड़ा करकट से चुन चुन कर फेंके हुए दाने को खाते हैं उन्हें अचानक ही एक दिन एक छोटी सी बच्ची कूड़ेदान में फेंकी हुई मिली, फिर उस बूढ़े को उस बच्चे पे दया आयी और उसे अपना समझ के उसे अपने पास ही रखा, उसका लालन पोषण किया। खुद को जो कुछ भी मिलता था उसी से उस बच्ची की परवरिश की। यह एक बहुत ही सामाजिक दुर्घटना है जो लोग आए दिन करते रहते हैं, बच्चों को कचरे के डब्बे में डाल दिया जाता है, उन्हें मानवता से कोई मतलब नहीं, इस पर कठिन प्रहार किया गया।कचरा बाबा के रूप में अंजार हक बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रकाश परिकल्पना मनोज कुमार, संगीत संचालन कृष्ण कुमार का था। लेखक कृष्ण चंद्र ने बड़े ही मार्मिक ढंग से लिखा। अंत में संस्था परिवार द्वारा दोनों निर्देशकों को अंग वस्त्र, पुष्पगुच्छ, प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम में अंत में सभी टीम के सभी कलाकारों को प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। मंच संचालक दीपक कुमार को दर्शकों ने तालियां बजाकर अभिवादन किया।

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