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आज शाम में पश्चिम बंगाल की टीम द्वारा अनिकेत संध्या का दिनकर कला भवन में मंचन
BINOD KARN
BEGUSARAI : आशीर्वाद रंगमंडल के तत्वावधान में दिनकर कला भवन में आयोजित 10वां राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को ऑल माय संस नाटक का मंचन किया गया।
हैप्पी रणजीत के निर्देशन में यूनिकॉर्न एक्टर्स स्टुडियो, नई दिल्ली के कलाकारों ने नाटक ऑल माय सन्स का मंचन किया। ऑल माय सन्स 1946 में अमेरिकी नाटककार आर्थर मिलर द्वारा लिखित एक नाटक है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के समय की पृष्ठभूमि में स्थित ये नाटक, एक दिन के समयकाल के दौरान उधेड़बुन में फंसे केलर घराने की कहानी बयां करता है। जो केलर ने युद्ध के दौरान अपना मुनाफा कमाया है। अपने पड़ोसी स्टीव डिवर के साथ साझेदारी में जोए का युद्ध सामग्री सप्लाई करने का कारोबार है। कुछ समय पहले स्टीव को खोटे सिलेंडर सप्लाई करने का दोषी पाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कई लड़ाकू विमान दुर्घटना ग्रस्त हुए और 21 सैनिकों की जान चली गई। स्टीव इस वक्त जेल में बंद है, लेकिन उसका दावा है कि वो निर्दोष है। उसने जो भी किया वो जोए के ही ऑर्डर पर किया है। जो तुलनात्मक रूप में सुख से जीवन व्यतीत कर रहा है। अपनी बीवी काटे और अपने बेटे क्रिस के साथ, जो दो साल पहले अपनी आर्मी सर्विस से लौटा है। उनका बड़ा बेटा लैरी युद्ध के दौरान लापता हो गया था। सबका यही अनुमान है कि उसकी मृत्यु हो चुकी है, सिवाय काटे के, जिसको दृढ़ विश्वास है कि लैरी एक दिन जरूर लौटेगा। क्रिस आदर्शवादी है, जिसकी धीरे-धीरे युद्ध के बाद की दुनिया को देखकर मायूसी बढ़ती जा रही है। वो एन डिवर से प्यार में है, जो की स्टीव की बेटी है और एक समय लैरी की मंगेतर थी। जो को क्रिस और ऐन के जोड़े को अपनाने में जरा भी आपत्ति नहीं है, परंतु कैटे इस रिश्ते के विरुद्ध है, क्योंकि उसकी नजर में ऐन अभी भी लैरी की ही है। जैसे-जैसे कहानी की परते खुलती हैं, हम गवाह बनते हैं एक अचंभित कर देने वाले सिलसिलेवार घटनाक्रम, जो बहुत ही दक्षता से निरीक्षण करता है एक साम्राज्यवादी ढांचे के अधीन फंसे जन की। न्याय तथा भाईचारे के बिनाह पर लड़ी जा रही लड़ाई की आड़ में वे क्रूर, षड्यंत्रात्मक पैंतरे जो एक इंसान अपनाता है खुद को सुरक्षित रखने के लिए। नाटक में केट केलर की भूमिका में गौरी देवल, जो केलर की भूमिका में सहज हरजाई, क्रिस केलर की भूमिका में कृतार्थ सिंह ने शानदार प्रस्तुति की। वहीं ईवा सिद्धीकी ने ऐन, आदित्य सिन्हा ने जॉर्ज और उनीष यादव ने लैरी का किरदार निभाया। वहीं प्रखर ओझा ने संगीत संचालन, हैप्पी रणजीत ने प्रकाश परिकल्पना, इकबाल सिंह ने सेट परिकल्पना, गौरी देवल ने वेशभूषा का काम किया। कलाकारों ने जीवंत भूमिका अदा कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
इससे पूर्व महोत्सव के प्रथम सत्र में समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर अतिथियों ने किया। वरिष्ठ रंगकर्मी अवधेश सिन्हा ने कहा कि आशीर्वाद रंगमंडल ने अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव बेगूसराय में आयोजित कर इतिहास रचने का काम किया वहीं लगातार रंगकर्म के क्षेत्र में काम करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि कला-संस्कृति के धरोहर के संवर्द्धन में यह संस्था लगातार काम कर रही है। वरिष्ठ रंग निर्देशक सह दिनकर कला भवन के सचिव अनिल पतंग ने कहा कि दिनकर कला भवन की नींव के समय से जुड़ा हूं। अब भी इस दायित्व का निर्वहन कर रहा हूं। नाटक के विकास में आशीर्वाद रंगमंडल का अतुलनीय योगदान है। इसी तरह बेगूसराय में नाटक का विकास होता रहे, यह हमारी मनोकामना है। प्राचार्य डॉ. रामनरेश पंडित रमण ने कहा कि जिंदगी एक तरह का नाटक है। हम सब उसके किरदार हैं। पर्दा उठने और पर्दा गिरने का क्र्रम जारी रहता है। हमें खुशी है कि आशीर्वाद रंगमंडल इस तरह के महोत्सव का लगातार आयोजन कर रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता ललन प्रसाद सिंह ने की तो संचालन दीपक कुमार ने किया। इस मौके पर फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अमित रौशन एवं अध्यक्ष ललन प्रसाद सिंह ने मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र व मोमेंटो प्रदान कर स्वागत किया। मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी अंजुला महर्षि, रंग समीक्षक अजीत राय, संजय महर्षि, प्रदीप बिहारी, अभिजीत कुमार मुन्ना, रौशन कुमार, दीपक सिन्हा, पुष्कर प्रसाद सिंह, हरिशंकर गुप्ता, परवेज यूसूफ, रामानुज राय समेत सैकड़ों दर्शक मौजूद थे।
वहीं फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अमित रौशन ने बताया कि नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को चंदन सेन के निर्देशन में पश्चिम बंगाल की टीम के द्वारा अनिकेत संध्या, चौथे दिन सोमवार को सचिन कुमार के निर्देशन में मैथिली नाटक कांट का मंचन होगा। राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का समापन 26 मार्च को हमिदाबाई की कोठी नाटक के मंचन के साथ होगा। वहीं 25 मार्च को स्मॉल टाउन जिंदगी नाटक का मंचन किया जाएगा।