जीवन की जटिलता की एक मार्मिक परीक्षा "स्मॉल टाउन जिंदगी का" मंचन बेगूसराय में, कलाकारों ने दर्शकों पर छोड़ा अमिट छाप
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जीवन की जटिलता की एक मार्मिक परीक्षा "स्मॉल टाउन जिंदगी का" मंचन बेगूसराय में, कलाकारों ने दर्शकों पर छोड़ा अमिट छाप

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 एक छोटे से शहर में बसे विश्वास, अस्तित्व और मानवीय स्थिति के समृद्ध ताने-बाने और संघर्ष को जीवंत करता नाटक 'स्माॅल टाउन जिंदगी' 



BINOD KARN 

BEGUSARAI : आशीर्वाद रंगमंडल के तत्वावधान में मंगलवार को कला संस्कृति मंत्रालय केंद्र सरकार के सहयोग से दिनकर कला भवन में आयोजित 10वां राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के पांचवें दिन "स्मॉल टाउन जिंदगी का" नाटक का मंचन किया गया। "स्मॉल टाउन जिंदगी का" के कलाकार दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इतना ही नहीं जीवंत अदाकारी को लेकर लोग याद भी करते रहेंगे।

हृषिकेश सुलभ के उपन्यास आधारित नाटक स्मॉल टाउन जिंदगी का नाटक एक छोटे से शहर में बसे विश्वास, अस्तित्व और मानवीय स्थिति के समृद्ध ताने-बाने में डूबो देता है। नाटक के केंद्र में रशीदन का संघर्ष है जो कथा को समृद्ध करता है। उसके काम क़ब्र-खुदाई से जुड़े सामाजिक कलंक के ख़िलाफ़ उसकी अथक लड़ाई को चित्रित करता है। उसकी बेटी, अमीना, इस संघर्ष को प्रतिबिंबित करती है, जो एक ऐसे चक्र में फंस गई है कि इससे निकलकर भागने के प्रयासों के बावजूद अटूट लगता है। नाटक उसकी आंतरिक दुनिया की एक झलक पाने का अवसर देते और सांत्वना के क्षणभंगुर पल प्रदान करते हुए अमीना के दाता पीर के दृष्टिकोण के माध्यम से एक असली, दार्शनिक तत्व को प्रस्तुत करता है। फज़लू, जिसका जीवन- जीवन की क्रूर सच्चाइयों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वह कम उम्र से ही शारीरिक परिश्रम, सामाजिक तिरस्कार और अस्तित्वगत प्रतिबिंब के बोझ से जूझते हुए कब्र-खुदाई की पारिवारिक परंपरा में फंसा हुआ है। इसके विपरीत, साबिर का जीवन एक अलग रास्ता पकड़ता है। उसी दरिद्र पृष्ठभूमि में से उभरते हुए, साबिर को संगीत के माध्यम से एक राहत मिलती है, पटना की धूल भरी सड़कों से शास्त्रीय शहनाई की दुनिया तक की उसकी यात्रा फज़लू के उदास अस्तित्व के सापेक्ष एक जीवंत विपरीतता है। यह जुड़ाव इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे भाग्य, अवसर और व्यक्तिगत पसंद किसी की नियति को गढ़ते हैं।
रशीदन और अमीना के समानांतर जीवन के माध्यम से, नाटक व्यवस्थागत दारिद्रय पर नियंत्रण पाने के पीढ़ीगत संघर्ष और इसके द्वारा लगाई गई जाने वाली सीमाओं की पड़ताल करता है। 'स्मॉल टाउन ज़िंदगी’ जीवन की जटिलता की एक मार्मिक परीक्षा है, जो मानव आत्मा के लचीलेपन और अर्थ की तलाश में जीवन के विविध रास्तों का जश्न मनाती है। नाटक में सुनील कुमार राम ने आदिल रशीद, अंजलि शर्मा राहुल रवि रोशनी कुमारी प्रियांशी सौरभ सागर संदेश कुमार ने अपनी जीवंत भूमिका निभाई। कृष्ण समिद्ध के निर्देशन में आयोजित नाटक में मल्टीमीडिया-विशाला आर महाले, वेशभूषा रणधीर कुमार, कोरियोग्राफ़ी रोशनी कुमारी और प्रियांशी, ध्वनि-राहुल राज एवं प्रकाश व्यवस्था में रणधीर कुमार और राजीव कुमार शामिल थे। फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अमित रौशन ने कहा कि 26 मार्च को नाट्य महोत्सव का समापन हमीदाबाई की कोठी नाटक के मंचन से होगा। बेगूसराय के दर्शकों की भीड़ रोज ब रोज बढ़ रही है।

इससे पूर्व महोत्सव के प्रथम सत्र में समारोह का उद्घाटन परवेज युसूफ, साहित्यकार मेनका मल्लिक, रंगकर्मी राजेश राजा, डॉ. शगुफ्ता ताजवर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। स्वागतकर्ता ललन प्रसाद सिंह, फेस्टिवल डायरेक्टर सह सचिव डॉ अमित रौशन एवं अभिजीत मुन्ना ने अतिथियों को चादर और प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया। अतिथियों ने राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के इस भव्य आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से क्षेत्र में कला संस्कृति का विकास होगा। वहीं नए रंगकर्मियों को एक नई सीख मिलेगी। मौके पर वरिष्ठ रंग समीक्षक अजीत राय, प्रदीप बिहारी, अमरेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ रंग निर्देशक अवधेश, रामानुज राय समेत सैकड़ों दर्शक मौजूद थे।






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