गंगा की सेवा के लिए विद्वता की जरूरत नहीं, सिर्फ संकल्प होना आवश्यक : डॉ आशीष गौतम - Ganga Sewa
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गंगा की सेवा के लिए विद्वता की जरूरत नहीं, सिर्फ संकल्प होना आवश्यक : डॉ आशीष गौतम - Ganga Sewa

THN Network (Desk): 

BINOD KARN


प्राकृतिक संसाधनों का मूल स्वरूप में रहना आवश्यक : रामाशीष जी

BEGUSARAI: गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष जी ने कहा कि भोगवादी प्रवृत्ति ने गंगा सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बहुत नुकसान किया है। इनका अपने मूल स्वरूप में रहना बहुत आवश्यक है। इसके लिए सरकार के साथ ही समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। दोनों मिलकर ही इस समस्या को दूर कर सकते हैं। 
गंगा ग्लोबल ज्ञान परिसर में शनिवार को आयोजित गंगा समग्र के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष जी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन अपने मूल स्वरूप में रहें तभी बेहतर हैं लेकिन हम अपनी भोगवादी प्रवृत्ति के चलते इस सीमा का उल्लंघन करने लगते हैं। हिमालय और गंगा इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। जोशीमठ की त्रासदी इसी भोगवादी संस्कृति की देन हैं। 


कुछ ऐसे ही कारकों से पनपी है। उन्होने कहा कि अग्रेजों ने सभी जलतीर्थों को वाटर बॉडी मानने की गलती की थी। इसका खमियाजा हम आज भुगत रहे हैं। विकृत आस्था और कुप्रथाओं के चलते भी गंगा का बहुत नुकसान हुआ है। इसे समाज जागरण के जरिए दूर किया जाएगा। इन विसंगतियों  को दूर करने के लिए ही गंगा समग्र का उदय हुआ है। उन्होने कहा कि नदी सिर्फ दो किनारों के बीच बहता पानी नहीं है। उस समस्त क्षेत्र का सम्पूर्ण जल उस नदी का जल होता है। इसलिए नदी को स्वच्छ रखने के लिये सतह के सभी जल को स्वच्छ रखना आवश्यक है। उन्होने कहा कि  गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर गंगा समग्र के अधीन 15 आयामों को शामिल किया गया है। उन्होने गंगा की अविरलता में वृक्षारोपण, जैविक कृषि आदि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हम सब सही मन से जुटेंगे तो गंगा निर्मल व अविरल निश्चित रूप से होगा। 


इस मौके पर महासचिव डॉ आशीष गौतम ने कहा कि गंगा समग्र का एक ही ध्येय है कि मां गंगा भारतीय संस्कृति का विकास और पोषण अनंत काल तक करती रहें। गंगा की सेवा के लिए विद्वता की जरूरत नहीं, सिर्फ संकल्प होना आवश्यक है। गंगा समग्र विभिन्न आयामों के जरिए इस काम में लगा है। गंगा समग्र के कार्यकर्ता का संकल्प दशरथ माझी जैसा दृढ़ होना चाहिए। गंगा अविरल और निर्मल हो जाएगी।
इस मौके पर गंगा समग्र के राष्ट्रीय मंत्री अवधेश कुमार ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें सरकार से मांग की गई कि सीवेज और औद्योगिक उत्सर्जन को किसी भी रूप में नदी में नहीं डालकर इसे कृषि और उद्योगों के लिये इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे पूर्व शंभु नारायण चौधरी लिखित पुस्तक केशव दर्शन का विमोचन किया गया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता गंगा समग्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने की। इस मौके पर गंगा समग्र के प्रांत संयोजक सर्वेश कुमार सिंह, राष्ट्रीय मंत्री रामाशंकर सिन्हा, अखिलेश सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रवि जी, प्रांत कार्यवाह अभय गर्ग जी आदि मौजूद थे।

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